प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि कश्मीर की समस्या बेहद पुरानी है और जब तक आर्टिकल 370 और 35A, ये दोनों धाराएं हटाई नहीं जाएंगी,...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि कश्मीर की समस्या बेहद पुरानी है और जब तक आर्टिकल 370 और 35A, ये दोनों धाराएं हटाई नहीं जाएंगी, वहां का विकास मुश्किल है.
भारतीय जनता पार्टी अपने 'संकल्प पत्र' की तरह
ही जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A हटाने के लिए प्रतिबद्धता जता रही
है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कश्मीर की समस्या बेहद पुरानी है.
जब तक ये दोनों धाराएं हटाई नहीं जाएंगी, वहां का विकास मुश्किल है. पहले
की सरकारों ने जम्मू-कश्मीर की समस्या को अनदेखा किया है, लेकिन अब वक्त
गया है कि इसका स्थायी हल निकाला जाना चाहिए.
निकल रहे हैं टॉपर्स बच्चे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से एक से बढ़कर एक टॉपर्स बच्चे निकल रहे हैं. आज हिंदुस्तान की टॉप यूनिवर्सिटी में कोई न कोई कश्मीरी बच्चा पढ़ता है. वहां विकास के लिए बजट में कभी कोई कमी नहीं आई. ऐसे में कश्मीर को लेकर सिर्फ दृष्टिकोण बदले की जरूरत है.
'IIM बने तो कोई प्रोफेसर जाने को तैयार नहीं'
पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आप IIM बनाओ, लेकिन कोई प्रोफेसर जाने को तैयार नहीं है. क्योंकि प्रोफेसर वहां जाएगा और उसके बच्चों को एडमिशन चाहिए, तो कानून आड़े आता है. उसको मकान चाहिए, तो कानून रुकावट डालता है. इन कानूनों के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों का बहुत नुकसान हुआ है. पंडित नेहरू जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए कुछ ऐसे नियम बनाकर गए हैं जो बहुत मुश्किल खड़ी कर रहे हैं. उनको एक बार फिर देखने की जरूरत है.
'कश्मीर की समस्या में वहां के कुछ राजनीतिक परिवार'
मोदी ने कश्मीर की समस्याओं के लिए वहां बैठे कुछ राजनीतिक परिवारों को सीधे तौर पर दोषी ठहराया. उन्होंने कहा कि वहां की समस्या कश्मीर की जड़ में बैठे कुछ राजनीतिक परिवार हैं. इतने साल से इन्हीं कुछ परिवारों ने सारी मलाई खाई है. ये परिवार कश्मीर के सामान्य नागरिकों को कोई भी फायदा नहीं पहुंचने देते हैं. ये राजनीतिक परिवार मुद्दों को इमोशनल बनाकर अपनी राजनीति चला रहे हैं. घाटी के लोग ऐसे लोगों से मुक्ति चाहते हैं, जिनके परिवारों ने वहां 50 साल से कब्ज़ा किया हुआ है. इसलिए अब कश्मीर की जनता ही बदलाव चाहती है, चाहे आर्टिकल 35ए का मामला हो या 370 का.
क्या है आर्टिकल 370?
- आर्टिकल 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है. लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए.
- इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान का आर्टिकल 356 लागू नहीं होता. इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है.
- 1976 का शहरी भूमि कानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता. सूचना का अधिकार कानून भी यहां लागू नहीं होता.
- लोकसभा में अनुच्छेद 370 को पारित कराने की जिम्मेदारी पटेल पर ही थी, क्योंकि नेहरू बाहर थे. पटेल ने अनिच्छा के बाद भी ये काम पूरा किया.
- इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कही भी भूमि खरीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं ख़रीद सकते.
- भारतीय संविधान का आर्टिकल 360, जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.
- राज्य की महिला अगर राज्य के बाहर शादी करती है तो वह यहां की नागरिकता गंवा देती है.
निकल रहे हैं टॉपर्स बच्चे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से एक से बढ़कर एक टॉपर्स बच्चे निकल रहे हैं. आज हिंदुस्तान की टॉप यूनिवर्सिटी में कोई न कोई कश्मीरी बच्चा पढ़ता है. वहां विकास के लिए बजट में कभी कोई कमी नहीं आई. ऐसे में कश्मीर को लेकर सिर्फ दृष्टिकोण बदले की जरूरत है.
'IIM बने तो कोई प्रोफेसर जाने को तैयार नहीं'
पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आप IIM बनाओ, लेकिन कोई प्रोफेसर जाने को तैयार नहीं है. क्योंकि प्रोफेसर वहां जाएगा और उसके बच्चों को एडमिशन चाहिए, तो कानून आड़े आता है. उसको मकान चाहिए, तो कानून रुकावट डालता है. इन कानूनों के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों का बहुत नुकसान हुआ है. पंडित नेहरू जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए कुछ ऐसे नियम बनाकर गए हैं जो बहुत मुश्किल खड़ी कर रहे हैं. उनको एक बार फिर देखने की जरूरत है.
'कश्मीर की समस्या में वहां के कुछ राजनीतिक परिवार'
मोदी ने कश्मीर की समस्याओं के लिए वहां बैठे कुछ राजनीतिक परिवारों को सीधे तौर पर दोषी ठहराया. उन्होंने कहा कि वहां की समस्या कश्मीर की जड़ में बैठे कुछ राजनीतिक परिवार हैं. इतने साल से इन्हीं कुछ परिवारों ने सारी मलाई खाई है. ये परिवार कश्मीर के सामान्य नागरिकों को कोई भी फायदा नहीं पहुंचने देते हैं. ये राजनीतिक परिवार मुद्दों को इमोशनल बनाकर अपनी राजनीति चला रहे हैं. घाटी के लोग ऐसे लोगों से मुक्ति चाहते हैं, जिनके परिवारों ने वहां 50 साल से कब्ज़ा किया हुआ है. इसलिए अब कश्मीर की जनता ही बदलाव चाहती है, चाहे आर्टिकल 35ए का मामला हो या 370 का.
क्या है आर्टिकल 370?
- आर्टिकल 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है. लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए.
- इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान का आर्टिकल 356 लागू नहीं होता. इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है.
- 1976 का शहरी भूमि कानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता. सूचना का अधिकार कानून भी यहां लागू नहीं होता.
- लोकसभा में अनुच्छेद 370 को पारित कराने की जिम्मेदारी पटेल पर ही थी, क्योंकि नेहरू बाहर थे. पटेल ने अनिच्छा के बाद भी ये काम पूरा किया.
- इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कही भी भूमि खरीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं ख़रीद सकते.
- भारतीय संविधान का आर्टिकल 360, जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता.
- राज्य की महिला अगर राज्य के बाहर शादी करती है तो वह यहां की नागरिकता गंवा देती है.

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