दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1957 में हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में न केवल मथुरा से चुनाव हार गए थे, बल्कि उनकी जमानत भी जब्त...
दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1957 में हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में न केवल मथुरा से चुनाव हार गए थे, बल्कि उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी.
कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस बार मतदान दूसरे चरण में 18 अप्रैल को होना है. इस सीट पर मौजूदा सांसद हेमा मालिनी की सीधी टक्कर महागठबंधन के तहत रालोद के कुंवर नरेंद्र सिंह से है. लेकिन, मथुरा लोकसभा सीट का इतिहास भी बड़ा रोचक रहा है. इस सीट से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को भी हार का सामना करना पड़ा था.
दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1957 में हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में न केवल मथुरा से चुनाव हार गए थे, बल्कि उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी. वे उस वक्त जनसंघ के टिकट पर मैदान में थे और उन्हें निर्दलीय राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने हराया था. हालांकि इस चुनाव में अटल दो जगह से चुनाव लड़े थे. उन्हें बलरामपुर सीट से जीत हासिल हुई थी.
उस चुनाव में अटल को महज 10 फ़ीसदी मत हासिल हुए थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी. कहा जाता है कि अटल कांग्रेस को तो हराना चाहते थे लेकिन उनकी नजर में राजा महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा मथुरा और पूरे देश व समाज के लिए किया गया त्याग व समर्पण एक सांसद बनने से बहुत ज्यादा महत्व रखता था. इसलिए वे उन्हें जिताना चाहते थे. यही वजह थी कि चुनाव से पहले उन्होंने जनता से अपील की कि वे राजा महेंद्र प्रताप सिंह को जीता दें.
और हुआ भी था वैसा ही. राजा महेंद्र प्रताप सिंह जीत गए. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चौधरी दिगम्बर सिंह दूसरे, पूरन निर्दलीय तीसरे व वाजपेयी चौथे स्थान पर रहे. उस समय उन्हें कुल पड़े 2 लाख 34 हजार 19 मतों में से मात्र 23 हजार 620 मत मिले थे.

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