महिलाएं भी नहीं है पीछें. लिस्ट में तीन साध्वियां शामिल. एक साधु 17वीं बार लड़ रहा है चुनाव. मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी रही साध्वी प्...
महिलाएं भी नहीं है पीछें. लिस्ट में तीन साध्वियां शामिल. एक साधु 17वीं बार लड़ रहा है चुनाव.
मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी रही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से टिकट देने का ऐलान किया है. यहां उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से होगा. साध्वी भले ही बीजेपी का दामन थामकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, लेकिन उन पर अभी भी 2008 में हुए मालेगांव ब्लास्ट से जुड़ा एक मामला चल रहा है.
बीजेपी सांसद साक्षी महाराज को फिर से उन्नाव से टिकट दिया गया है. बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में ही उनका नाम घोषित किया. वे 2014 में भी बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए थे. साक्षी महाराज के सामने कांग्रेस की तरफ से पूर्व सांसद अनु टंडन मैदान में हैं.
कांग्रेस ने लखनऊ सीट से आचार्य प्रमोद कृष्णम को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. यहां कृष्णम का मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी और वर्तमान में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और गठबंधन की प्रत्याशी पूनम सिन्हा से होगा. आचार्य प्रमोद कृष्णम और उनकी पीठ कई बार विवादों में रही है. लखनऊ से कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद फर्जी बाबाओं की सूची में भी डाल चुका है.
भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं बहराइच से भाजपा की सांसद रहीं सावित्री बाई फूले को अब कांग्रेस ने बहराइच से टिकट दिया गया है. साध्वी सावित्री बाई फुले कपड़े तो भगवा पहनती हैं लेकिन काफी वक्त से 'भगवा ब्रिगेड' लगातार उनके निशाने पर था. बीजेपी में रहते हुए वह लगातार आरक्षण और दलित उत्पीड़न जैसे मसलों पर पार्टी को सवालों के घेरे में खड़ी करती रही थीं. वह उन चुनिंदा दलित सांसदों में शामिल थीं जो पार्टी से नाराज थे. फुले बीजेपी में महत्वपूर्ण दलित-महिला चेहरा थीं. छह साल की उम्र में उन्हें विवाह के लिए मजबूर किया गया था, हालांकि उनकी विदाई नहीं हुई थी. बड़े होने पर उन्होंने ससुराल पक्ष वालों को बुलाकर अपनी छोटी बहन की शादी अपने पति से करा दी और संन्यास लेकर वे बहराइच के जनसेवा आश्रम से जुड़ गईं.
निरंजन ज्योति, उमा भारती के बाद वे केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुंचने वाली देश की दूसरी साध्वी हैं. वे केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री हैं. उन्हें फतेहपुर सीट से दोबारा टिकट मिला है. 52 साल की निरंजन ज्योति 2014 में उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से जीतकर पहली बार सांसद बनी थीं. इससे पहले वे फतेहपुर से ही 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक चुनी गई थीं. साध्वी निरंजन ज्योति मूलत: कथावाचक हैं. मूसा नगर, कानपुर देहात में साध्वी निरंजन ज्योति का आश्रम है.
उपचुनाव में हाथ से फिसली अलवर लोकसभा सीट को फिर से हासिल करने के लिए बीजेपी ने दोबारा से नाथ सम्प्रदाय के महंत बालक नाथ पर भरोसा जताया है. बीजेपी ने अलवर से इस बार पूर्व सांसद दिवंगत मंहत चांदनाथ के शिष्य बाबा बालकनाथ को अपना प्रत्याशी बनाया है. 1985 में जन्मे बालकनाथ अलवर जिले के बहरोड़ क्षेत्र के मोहराणा गांव के रहने वाले हैं. महज छह वर्ष की आयु में वर्ष 1991 में वह हरियाणा के रोहतक में बाबा मस्तनाथ मठ अस्थल बोहर के महंत चांदनाथ योगी के शिष्य बन गए थे. बालकनाथ पिछले 15 साल से हनुमानगढ़ जिले में बाबा मत्सनाथ आश्रम में रह रहे थे. वह महंत चांदनाथ के काफी नजदीकी रहे हैं. महंत चांदनाथ भी शुरुआती दिनों में इसी आश्रम में रहते थे.
राजस्थान के सीकर से बीजेपी सांसद सुमेधानंद सरस्वती देश के सबसे गरीब सांसदों में से एक हैं. उनकी संपत्ति महज 34, 311 रुपये है जो कि अभी तक की सबसे न्यूनतम है. वह इस बार भी सीकर से चुनाव लड़ रहे हैं. राजस्थान के सीकर से बीजेपी सांसद सुमेधानंद सरस्वती देश के गरीब सांसदों में से एक हैं सरस्वती ने 2014 में सीकर से चुनाव लड़ा था, इस बार भी उन्हें सीकर से प्रत्याशी बनाया गया.
महास्वामी जयसिद्धेश्वर शिवाचार्य भगवाधारी महास्वामी एक लिंगायत नेता हैं और सोलापुर से बीजेपी के उम्मीदवार- यह भगवाधारी साधु दो मज़बूत दलित नेताओं के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे- इनमें एक हैं डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर के पौत्र वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रकाश आंबेडकर और दूसरे हैं कांग्रेस के उम्मीदवार सुशील शिंदे. सोलापुर का चुनाव इस साधु के मैदान में कूदने से काफी दिलचस्प हो गया है.
उत्तर प्रदेश की मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे 73 वर्षीय फक्कड़ बाबा रामायणी का ये 17वां चुनाव है. वे 16 बार अपनी जमानत जब्त करा चुके हैं. साल 1977 से अब तक 8 बार लोकसभा और इतनी ही बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. हर बार की तरह इस बार भी बाबा ने नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही दिन पर्चा दाखिल किया था. खास बात ये है कि बाबा की प्रॉपर्टी 2 साल में घटकर आधी से भी कम हो गई है.









COMMENTS