यूएन ने कहा कि जेईएम को 17 अक्टूबर, 2001 को 'फाइनेंस, प्लानिंग, सुविधा में ... भाग लेने के लिए या ओसामा बिन लादेन और तालिबान के समर्थन...
यूएन ने कहा कि जेईएम को 17 अक्टूबर, 2001 को 'फाइनेंस, प्लानिंग, सुविधा में ... भाग लेने के लिए या ओसामा बिन लादेन और तालिबान के समर्थन में और हथियार की आपूर्ति के लिए' एक प्रतिबंधित संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को इसलिए प्रतिबंधित किया गया क्योंकि वो एक वर्जित संगठन से जुड़ा हुआ था. उसे बैन करने की यह मुख्य वजह है.
UNSC की ओर से यह कदम भारत समेत अन्य देशों द्वारा पाकिस्तान पर 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद बनाए गए दबाव से उठाया गया. मसूद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी. बता दें कि पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे.
हालांकि सुरक्षा परिषद की ओर से पुलवामा हमला या जम्मू और कश्मीर आतंकवाद का जिक्र कही नहीं किया गया है. UNSC द्वारा जारी किये गये बयान में कहा गया है कि 'मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी को 1 मई, 2019 को 2368 (2017) के पैराग्राफ 2 और 4 के अनुसार सूचीबद्ध किया गया जो कि अल-कायदा के लिए 'आर्थिक, प्लानिंग, सुविधा मुहैया कराने, तैयारी या गतिविधियों में हिस्सा लेता था. जैश-ए-मोहम्मद से जुड़कर यह हथियारों का ट्रांसफर (स्थानांतरण), लोगों की नियुक्ति करने के लिए प्रतिबंधित किया जाता है.'
बता दें कि पुलवामा हमले के कुछ दिन बाद फरवरी में सुरक्षा परिषद की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति में अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस एक नया प्रस्ताव लेकर आए थे.
भारत ने मसूद अजहर के प्रतिबंधित होने को राजनयिक जीत के रूप में बताया. जबकि कांग्रेस के शशि थरूर सहित कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमले और आतंकवाद के प्रपोजल को संयुक्त राष्ट्र ने हटा दिया है.

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